चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - 07 नवम्बर 2026 को 10:47 AM
चतुर्दशी तिथि समाप्त - 08 नवम्बर 2026 को 11:27 AM
दीपावली का पाँच दिवसीय उत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। इस दौरान नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान करने की विशेष परंपरा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापों से मुक्ति और नरक से बचाव का प्रतीक माना जाता है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का महत्व
दीपावली के अवसर पर चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा, इन तीन दिनों में अभ्यंग स्नान करना शुभ माना जाता है। इनमें नरक चतुर्दशी के दिन किया जाने वाला अभ्यंग स्नान सबसे महत्वपूर्ण होता है।
अभ्यंग स्नान में शरीर पर तिल के तेल से मालिश की जाती है और पारंपरिक उबटन का प्रयोग करके स्नान किया जाता है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और नरक की यातनाओं से बचाव होता है।
नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान चतुर्दशी तिथि में चंद्रोदय के समय से लेकर सूर्योदय से पहले तक करना चाहिए।
अभ्यंग स्नान के लिए चंद्रोदय और सूर्योदय के बीच का समय विशेष शुभ माना जाता है। इसलिए इसका मुहूर्त स्थानीय चंद्रोदय, सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
कभी-कभी नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन पड़ते हैं। ऐसा तब होता है जब चतुर्दशी तिथि सूर्योदय से पहले प्रभावी हो और अमावस्या तिथि सूर्यास्त के बाद प्रारंभ हो। इस कारण नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान और दीपावली की लक्ष्मी पूजा एक ही दिन हो सकते हैं।
नरक चतुर्दशी और काली चौदस में अंतर
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। कई बार इसे काली चौदस के समान माना जाता है, लेकिन धार्मिक परंपराओं में दोनों अलग-अलग पर्व हैं।
हालाँकि, दोनों पर्व चतुर्दशी तिथि पर ही मनाए जाते हैं, लेकिन तिथि के प्रारंभ और समाप्त होने के समय के आधार पर इनके उत्सव अलग-अलग दिनों में भी पड़ सकते हैं।
इस प्रकार नरक चतुर्दशी दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का एक महत्वपूर्ण दिन है, जो अभ्यंग स्नान, शुद्धता और नकारात्मकता से मुक्ति की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।








