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Aarti

Shri Amba Mata Ji Ki Aarti

श्री अम्बा माता जी की आरती

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The devotional text below is in its original Hindi.

श्री अम्बा माता जी की आरती
In short

जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा के अम्बा स्वरूप की अत्यंत लोकप्रिय आरती है, जिसमें सिंह पर सवार, खड्ग खप्परधारी माता के रूप और शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर, चण्ड-मुण्ड तथा मधु-कैटभ के संहार का गुणगान है। इसे नवरात्रि की हर शाम, मंगलवार और शुक्रवार को तथा दैनिक देवी पूजा में श्रद्धा से गाया जाता है।

Key points

  • यह आरती माँ दुर्गा के अम्बा, गौरी और श्यामा स्वरूप को समर्पित है।
  • आरती के अनुसार हरि, ब्रह्मा और शिव निशिदिन माता का ध्यान करते हैं।
  • माता को केहरि वाहन पर सवार और खड्ग खप्परधारी बताया गया है।
  • आरती में शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर और चण्ड-मुण्ड के वध का उल्लेख है।
  • अंतिम पंक्ति में शिवानन्द स्वामी का नाम आता है।

॥ आरती श्री अम्बा जी ॥

जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी ॥१॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।

उज्जवल से दोउ नैना,चन्द्रवदन नीको॥२॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥३॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥४॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥५॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥६॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे॥७॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

ब्रह्माणी रुद्राणीतुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥८॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥९॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुःख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥१०॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥११॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥१२॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

श्री अम्बेजी की आरती,जो कोई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥१३॥

॥जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी॥

Frequently asked questions

जय अम्बे गौरी आरती कब गानी चाहिए?
यह आरती प्रतिदिन सुबह और शाम की देवी पूजा में गाई जा सकती है। नवरात्रि के नौ दिनों में हर शाम, मंगलवार और शुक्रवार को तथा दुर्गा अष्टमी पर इसे विशेष श्रद्धा से गाया जाता है।
अम्बे माता की आरती कैसे करें?
माता की प्रतिमा या चित्र के सामने लाल चुनरी, लाल फूल और सिन्दूर अर्पित करें। आरती में बताए अनुसार कंचन थाल में अगर, कपूर और बाती का दीपक जलाकर घंटी बजाते हुए श्रद्धा से आरती गाएं और अंत में प्रसाद बाँटें।
जय अम्बे गौरी आरती में माता के किन रूपों का वर्णन है?
आरती में माता को ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला रानी और शिव पटरानी कहा गया है। उनका कलेवर सोने जैसा, वस्त्र लाल, चार भुजाएं और वर मुद्रा है। उन्हें जग की माता और भक्तों के दुख हरने वाली बताया गया है।
अम्बे माता की आरती गाने के क्या लाभ हैं?
आरती के अनुसार माता भक्तों के दुख हरती हैं और सुख सम्पत्ति देती हैं। जो नर-नारी उनकी सेवा करते हैं, उन्हें मनवांछित फल मिलता है। अंतिम पंक्ति कहती है कि अम्बे जी की आरती गाने वाला सुख सम्पत्ति पाता है।
आरती में किन असुरों के संहार का उल्लेख है?
आरती में माता द्वारा शुम्भ-निशुम्भ को बिदारने, महिषासुर का वध करने, चण्ड-मुण्ड का संहार करने, शोणित बीज यानी रक्तबीज को हरने और मधु-कैटभ को मारकर देवताओं को भयमुक्त करने का वर्णन है।
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