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The devotional text below is in its original Hindi.
In short
ॐ जय लक्ष्मी माता धन, सुख और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी की अत्यंत लोकप्रिय आरती है, जिसमें उन्हें जग-माता, सुख सम्पत्ति दाता और क्षीर सागर से प्रकट देवी कहा गया है। इसे दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन, धनतेरस और हर शुक्रवार की पूजा में परिवार के साथ मिलकर श्रद्धा से गाया जाता है।
Key points
यह आरती धन, सुख और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है।
आरती में माता को उमा, रमा, ब्रह्माणी और जग-माता कहा गया है।
माता लक्ष्मी को क्षीरोदधि यानी क्षीर सागर से प्रकट बताया गया है।
आरती के अनुसार माता के बिना चौदह रत्न कोई नहीं पाता।
दीपावली, धनतेरस और शुक्रवार की पूजा में यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है।
॥ आरती श्री लक्ष्मी जी ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥१॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥२॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥३॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥४॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥५॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥६॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥७॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती,जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥८॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता॥
Frequently asked questions
लक्ष्मी जी की आरती किस दिन करनी चाहिए?
लक्ष्मी जी की आरती प्रतिदिन की जा सकती है, पर शुक्रवार को इसका विशेष महत्व माना जाता है। दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन, धनतेरस, शरद पूर्णिमा और वैभव लक्ष्मी व्रत में यह आरती विशेष श्रद्धा से गाई जाती है।
दीपावली 2026 पर लक्ष्मी जी की आरती कब करें?
दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। इस दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद ॐ जय लक्ष्मी माता आरती गाई जाती है।
लक्ष्मी जी की आरती कैसे करें?
स्नान करके पूजा स्थान साफ करें और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने कमल या लाल फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। थाली में घी का दीपक जलाकर घंटी बजाते हुए परिवार के साथ आरती गाएं और अंत में प्रसाद बाँटें।
लक्ष्मी जी की आरती गाने के क्या लाभ हैं?
आरती के अनुसार जो माता का ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन मिलता है। जिस घर में माता रहती हैं, वहाँ सब सद्गुण आते हैं और मन नहीं घबराता। अंतिम पंक्ति कहती है कि यह आरती गाने वाले के मन में आनंद आता है और पाप दूर होते हैं।
आरती में रत्न चतुर्दश का क्या अर्थ है?
रत्न चतुर्दश का अर्थ है चौदह रत्न, जो समुद्र मंथन से निकले माने जाते हैं। आरती में माता लक्ष्मी को क्षीर सागर से प्रकट बताते हुए कहा गया है कि उनकी कृपा के बिना कोई भी इन चौदह रत्नों को प्राप्त नहीं कर सकता।